उत्तर प्रदेश

गंगा का जलस्तर स्थिर, सरयू में घटाव जारी; 82 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में

Kavita2
24 Aug 2026 1:10 PM IST
गंगा का जलस्तर स्थिर, सरयू में घटाव जारी; 82 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में
x

बलिया। जिले में बाढ़ की स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है। गंगा का जलस्तर स्थिर बताया जा रहा है, जबकि सरयू नदी में पिछले दो दिनों से लगातार घटाव दर्ज किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले के 82 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और बड़ी आबादी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिला आपदा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा और सरयू का जलस्तर अपने न्यूनतम खतरा बिंदु पर पहुंचने की स्थिति में भी जिले के 82 गांवों की करीब 1.05 लाख आबादी प्रभावित होती है। मौजूदा हालात में कई इलाकों में बाढ़ का पानी लोगों के घरों और संपर्क मार्गों तक पहुंच चुका है।

गंगा का जलस्तर अभी न्यूनतम खतरा बिंदु से 1.286 मीटर ऊपर बना हुआ है। वहीं सरयू का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि सरयू के जलस्तर में पिछले दो दिनों से कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन नदी के खतरा निशान से ऊपर बहने के कारण नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

82 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित

जिले के 82 से अधिक गांव बाढ़ की स्थिति से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इन गांवों में पानी भरने के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई ग्रामीण इलाकों में आवागमन के रास्ते पानी में डूब गए हैं। इससे लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए बाहर निकलने में परेशानी हो रही है।

सबसे गंभीर स्थिति उन गांवों में बताई जा रही है, जहां बाढ़ का पानी मुख्य मार्गों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई जगहों पर प्रशासन की ओर से नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में पानी के बीच से होकर सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है।

नाव नहीं मिलने से जोखिम में ग्रामीण

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि गांवों से बाहर निकलने के लिए कई स्थानों पर नाव की जरूरत है, लेकिन पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध नहीं होने से लोगों को खुद ही रास्ता तलाशना पड़ रहा है। कुछ लोग पानी में तैरकर सड़क तक पहुंचने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी है। तेज बहाव वाले पानी में तैरकर बाहर निकलने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए ऐसी परिस्थितियां ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित गांवों में तत्काल नाव और अन्य राहत संसाधनों की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

शहर के निचले इलाकों में भी पहुंचा पानी

बाढ़ का असर केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। गंगा का पानी शहर के निचले इलाकों में भी प्रवेश कर गया है। इससे इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई घरों के आसपास बाढ़ का पानी जमा होने से लोगों को घर से बाहर निकलने में परेशानी हो रही है।

जलस्तर बढ़ने और घरों में पानी घुसने की आशंका के बीच कुछ परिवार अपना घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति लगातार बनी रहने के कारण उन्हें अपने घर और सामान की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है।

सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन

शहर के निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर घर खाली करना शुरू कर दिया है। लोग जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। हालांकि सभी परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर जाना आसान नहीं है।

जिन लोगों के पास रिश्तेदारों या परिचितों के यहां जाने का विकल्प है, वे वहां शरण ले रहे हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहने की जगह और भोजन की व्यवस्था की है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रभावित लोगों को राहत सामग्री और सुरक्षित आवागमन की जरूरत है।

प्रशासन की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

बाढ़ प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कई इलाकों में स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रशासन की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खासकर नाव की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष है।

लोगों का कहना है कि बाढ़ हर वर्ष जिले के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। ऐसे में प्रशासन को पहले से ही संवेदनशील गांवों में नाव, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि समय पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।

सरयू में घटाव से थोड़ी राहत

सरयू नदी के जलस्तर में पिछले दो दिनों से कमी आना राहत की बात है। लगातार घटाव से प्रभावित इलाकों में आने वाले दिनों में स्थिति सुधरने की उम्मीद है। हालांकि नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, इसलिए पूरी तरह राहत की स्थिति नहीं मानी जा सकती।

गंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर है। ऐसे में प्रशासन और बाढ़ प्रभावित लोगों की नजर नदी के जलस्तर में होने वाले अगले बदलाव पर टिकी हुई है। यदि गंगा का जलस्तर कम होता है तो बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

1.05 लाख आबादी पर मंडराता है खतरा

जिला आपदा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा और सरयू का जलस्तर न्यूनतम खतरा बिंदु तक पहुंचने पर ही जिले के 82 गांवों की करीब 1.05 लाख आबादी प्रभावित हो सकती है। मौजूदा समय में दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं, इसलिए बड़ी आबादी पर बाढ़ का असर बना हुआ है।

ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों में आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना है। नाव, भोजन, पेयजल, दवाइयां और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए प्राथमिक जरूरत बनी हुई है।

फिलहाल गंगा का जलस्तर स्थिर और सरयू में घटाव जारी होने से थोड़ी उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन 82 से अधिक गांवों में बाढ़ का असर अभी बरकरार है। शहर के निचले इलाकों में भी पानी पहुंचने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर नाव और राहत सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था करे, ताकि लोगों को पानी में तैरकर सड़क तक पहुंचने जैसी जोखिम भरी स्थिति का सामना न करना पड़े।

Next Story